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नवनाथ

Shabar Mantra - Navnath Chaurasi Siddh

दत्तात्रेय – त्रिदेव स्वरूप  (अवधूत योगी)
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श्री गुरु दत्तात्रेय जी के शिष्य योगी मत्स्येन्द्र जी हुए थे. यह ही नाग संप्रदाय के पहले गुरु थे, जिन्होने नाग संप्रदाय को चलाया.इनकी साधना करने का एक अलग ही योग था. जो प्रत्येक मंत्र, तन्त्र, योग का तत्काल फल चाहते थे. इस साधना को करने के बाद जल्दी ही फल प्राप्त हो जाता था. नाथ पंथ नेपाल से चला था. नेपाल के मोज़मती नामक गाँव मे श्री मत्स्येन्द्र नाथ धाम है. वहाँ प्रति वर्ष वैशाख मास मे तीन दिन तक बड़ा उत्सव मनाया जाता है. नेपाल सरकार के पुस्तकालय मे मत्स्येन्द्र नाथ लिखित कौल ज्ञान निर्णय नामक पुस्तक की पांडु लिपि अभी भी सुरक्षित बतायी जाती है.

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