Shabar Mantra

परकाया प्रवेश

किसी दुसरे के शरीर में प्रवेश करने को परकाया प्रवेश कहते हैं। यह अति उच्च स्तिरीय गुप्त विद्या है और इसे प्रयोग करने के लिए नियम भी बहुत सख्त हैं। साथ-साथ इसमें खतरा भी हद से ज्यादा है। अति उच्च स्तर के सिद्ध योगी ही ऐसा करने मे सक्षम हैं। परकाया प्रवेश ज्यादातर मृत शरीर में ही होता है। क्योकिं जिवित शरीर में पहले से ही आत्मा विद्यमान है, अतः उसमें प्रवेश के कुछ द्सरे असाधरण नियम है।

जिवित शरीर में पहले से मौजूद आत्मा के समानान्तर खुद को उस शरीर में स्थापित करना इतना आसान नही है। इस तरह के मामलों में उस जिवित शरीर से इज़ाज़त लेने का प्रावधान है। किसी जिवित शरीर में प्रवेश के लिए दुष्टात्माएं अत्याचार का सहारा लेती हैं, वही पवित्र आत्मांए मर्यादाओं और नियमों का पालन करती हैं। दोंनों ही परिस्थितियों में शरीरी आत्मा को पता होता है कि उसके शरीर में किसी अन्य आत्मा का प्रवेश हुआ है। असल में दुष्टात्माएं परमात्मा से नही डरती, जबकि पवित्र आत्माएं, परमात्मा का आदर करती हैं और सृष्टि के नियमों का पालन करती हैं।

कुछ विशेष नियम

  1. शुद्ध और पुर्ण स्वच्छ जिवित शरीर में केवल पवित्र आत्माएं ही प्रवेश कर सकती है।
  2. अशुद्ध और अस्वच्छ जिवित शरीर में ही बुरी आत्माएं प्रवेश करती हैं।
  3. धर्म स्थलों पर बुरी आत्माओं को सामान्यतः सीधे प्रवेश की इज़ाज़त नही है। ऐसा करने पर उनके सुक्ष्म शरीर में आग लग जाती है और उन्हें वहां से भागना ही पडता है।
  4. अशरीरी आत्मा केवल जिवित शरीर में ही प्रवेश करके ही धर्म स्थलों पर प्रवेश कर सकती है। ऐसे में उसे कुछ नही होता पर जिवित शरीरधारी आत्मा वहां खुद को असहज महसूस करेगी। उसका स्वभाव बदल जायेगा।
  5. पूजा पाठ या धर्म कर्म करने वाले इन्सान की पवित्र एवं ताकतवर दिव्य शक्तियां रक्षा करती हैं। वे उसे बुराई से बचाती हैं।
  6. बुराई पंचप्रेत पर चलती है। ये पंचप्रेत हैंः काम, क्रोध, लोभ, मोह एवं अहंकार।
  7. पंचप्रेत से विकार उत्पन्न होता है और विकार से पाप उत्पन्न होता है। विकार से ग्रसित पाप-आत्मा ही बुरी आत्माओं का शिकार बनती हैं।
  8. परकाया प्रवेश करने वाली आत्मा जिवित शरीरधारी आत्मा के कर्मों को जानने के बाद ही उसमें प्रवेश करती हैं क्योंकि हर शरीर हर आत्मा के काम का नही होता।
  9. खुद को शरीर और कपडों से पूरी तरह पाक साफ़ रख कर बुरी आत्माओं के प्रभाव से काफ़ी हद तक बचा जा सकता है। इसलिए साफ़ सफ़ाई का विशेष ख्याल रखिए।
  10. परमात्मा की पूजा उपासना करने वाले से बुरी आत्माएं डरती है। ऐसे इन्सान की आत्मिक शक्ति बहुत ज्यादा होती है। उससे बुरी आत्माएं सदा दूर रहती हैं।

परमात्मा की पूजा उपासना से ही कल्याण होता है।  ॐ की पूजा किजिए। सदा ॐ का मनन चिन्तन किजिए। ॐ का ध्यान किजिए। ॐ ही परमात्मा है। ॐ ही इस सृष्टि का सबसे बडा सत्य है। यही जीवन का आधार है।

शैतान

ऐसा विश्वास किया जाता है कि शैतान शुरू से ही बुरी आत्मा नही था। किसी समय में उसने खुदा की बडी इबादत की थी। जितनी और जैसी इबादत उसने की खुदा की, शायद ही किसी ने की हो। वो एक अच्छी आत्मा था। खुदा को बडा जानने और मानने वाला था।

आखिर फिर ऐसा क्या हुआ कि वो खुदा का दुश्मन बन गया। धर्म के अनुसार इसका कारण था अहंकार और समय के अनुसार इसका कारण था अन्नाय। धर्म के अनुसार, परमेश्वर के आदेश का पालन न करना, उसका अहंकार था, और इसी के कारण उसे स्वर्गिक सुखों से वंचित कर दिया गया। यह परमेश्वर के द्वारा उस पर की गयी दंडात्मक कार्रवाई थी। शैतान के अनुसार, उस समय, उसके साथ अन्नाय हुआ और इसी कारण वो खुदा का दुश्मन बन गया।

शैतान
शैतान

उसके मुताबिक, जिस कारण इस कायनात में उसे खुदा से अपमान सहना पडा, वो कारण था इंसान। बदले की भावना से भरे हुए, शैतान ने ये तय कर लिया कि वो भी खुदा से अपना बदला लेगा। जिस इंसान के कारण उसे सृष्टि में परमेश्वर से अपमान सहना पडा, वो उस इंसान को खुदा कि राह से भटकाएगा, उससे गुनाह कराएगा और उसे परमात्मा के खिलाफ़ कर देगा। इंसान को कभी भी चैन से जीने नही देगा। इंसान को तबाह कर देगा। इंसान की ये तबाही, खुदा पर उसकी जीत होगी। इंससे परमात्मा अपमानित होगा और शैतान का खुदा से बदला पूरा होगा। शैतान अपने इसी मकसद को पूरा करने में लगा रहता है।

शैतान, बुराईओं का राजा है। इंसान के मुकाबले, शैतान अत्यंत शक्तिशाली है। उसके पास अनेक अपार ताकतें हैं, जिन पर कोई साधारण मानव विजय नही पा सकता। इस दुनिया की सभी बुराईयां, उसकी ताकत है। हर बुरा विचार उसकी ताकत है। हर बुरी इच्छा उसकी ही माया है। अपनी ताकत से वो इंसान के दिलों-दिमाग पर कब्ज़ा करता है। उसमें बुरी इच्छाएं पैदा करता है। इन्हीं बुरी इच्छाओं के आधीन होकर इंसान बुरा बनता है। पथभ्रष्ट हो जाता है और इस तरह इंसान का पतन हो जाता है। इंसान का सब कुछ खो जाता है। उसका सत्यानाश हो जाता है। वो नेस्तोनाबुत हो जाता है। वो पापी आत्मा बनकर परमात्मा के द्वारा दंड का भागी बनता है और परमात्मा के द्वारा उसे दंड भोगना पडता है।

वास्तव में, इंसान को परमात्मा के द्वारा दंड दिलवाकर, शैतान खुद को इंसान से बडा साबित करता है। इससे परमात्मा का अपमान होता है और यही शैतान का मकसद है। ध्यान दें कि यहां इंसान का तात्पर्य पूरी मानव जाति से है जिसमें स्त्री और पुरुष दोनों शामिल हैं। इसलिए शैतान, इंसान जाति के नर और नारी दोनों को अलग अलग तरीके से भटकाता है। ये भटकाव ही बुराई है। शैतान की माया को नीच कर्मों की माया कहते हैं क्योंकि यह इंसान को नीच कर्म के लिये प्रेरित करती है।  इसी से बचना है।

शैतान से बचने का केवल एक ही रास्ता है और वो है परमात्मा की उपासना। खुदा की इबादत। इंसानियत सबसे बडा धर्म है। आप जिस भी धर्म में जन्में हैं, अपने-अपने धर्म के अनुसार परमात्मा की पूजा करें। खुदा की इबादत करें। ध्यान दें कि परमात्मा एक ही होता है, अनेक नही। देवी-देवता, पीर-पैगम्बर, संत, गुरू, महातमा या अनन्त-कोटि सिद्ध आत्माएं, परमेश्वर के सेवक मात्र है। परमात्मा ही सर्वोच्य है। उससे बडा कोई नही। इसलिए परमात्मा की शरण में रहिए और खुद का कल्याण किजिए। जन्नत या परमधाम के वासी बनिए।

Muthkarni

Muthkarni is a Maran Prayog (the Dead Spell) in Hinduism to kill someone. There are two types of Muthkarni, one can be seen and another one cannot be seen. People use the second one these days in which the power is invisible and attack on the target and kill him instantly or after some time at an early stage. In this magic spell, the power does not give you time to think upon it. What happened? how did it happen? who did it? You will be just an onlooker.  You cannot do anything to stop it as the word is being done metaphysically.

This is one of the most dangerous magic spells in the world as this is not so easy to escape it. Sometimes, the satanic powers or other evil spirits are used to send to destroy the target. They kill the target gradually, not all of a sudden. The person will fall sick and slowly will be going towards death or suicide tendencies will get created in his mind. He will be feeling himself to be dead.

The point to be noted is that Muthkarni spell is commonly started from (new moon) Amavasya and it takes 30 days to complete it. So, on the next Amavasya (new moon) the power is ordered to kill the target. And during this 30 days of period, the target will be feeling uneasiness, weakness without no reason, frastration, short tempered and suicide tendencies.

In case of bounce back, this spell can even kill the spell caster or the person, who has hired the spell caster to kill the target. So, be careful always.

Kamdev Vashikaran Mantra

Kamdev Vashikaran Mantra – Kamdev is the God of love and sex in hinduism who is responsible for exchange of sexual cosmic energies of males and females in this creation. The power as well as wife of this God is Rati which actually means sexual intercourse. This power has a direct connection with the minds of different creatures in this universe. Kam with his power Rati makes every male and female to attract and have sex with each other. If you want to become sexually powerful and attractive as well, kamdev vashikaran mantra helps you to fulfill your this desire. Please keep in mind that transformation of males and females energies is a divine exchange of the most powerful cosmic energies. It must be used for the mankind and good purposes. Use of this energy may bring dire consequences if done with bad intention. Respect this energy as you also begot by this divine exchange.

1. Kamdev Mantra to get Rati power

Om kamdevay vidmahe, rati priyay dheemahi tanno anang prachodyat. ( ‘ॐ कामदेवाय विद्महे, रति प्रियायै धीमहि, तन्नो अनंग प्रचोदयात‍्।’)

2. Kamdev Vashikaran Mantra to attract opposite sex

Om namoh bhagwate Kamdevay yasya yasya drashyo bhawami yasya yasya mam mukham pashyati tam tam mohyatu swaha (‘ॐ नमो भगवते कामदेवाय यस्य यस्य दृश्यो भवामि यस्य यस्य मम मुखं पश्यति तं तं मोहयतु स्वाहा।’)

Giving procedure and making the mantras energised in your name are our Paid Services. Please note that our all services are fully chargeable and not free of cost.

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I am the power

I am the power
I am the power

I am the power. I am the illusion. Where there is the force, there is me. I exist in various forms in each and every religion of this world. No tantra-mantra or magic spell is possible without my power.

Even I do not know who will call my which form and what he will make me to do for him. I am under control of the performer at that time. As, if one wants to kill someone, he (the target) cannot escape. The only way, he (the target) has to escape, is to call me in another form, from his side and send it back. Then, she destroys her. By this way, I am working bad in one form and good in another form.

The creation doesn’t run without illusion and the human life without Will (desire, infatuation, love). This is the Will, for which, one does good or bad for another one. This is the illusion of this creation.

I am the power. I am in the service of God. I obey what He orders. I am the Energy. I am The Goddess among Gods, I am the Evil among demons and I am also a woman among human. Where there is the female energy, it’s me. I am the power.

I am the one, who does good or bad. I am the one, who kills or saves you. I am the one, who takes away your sense or grants you with good sense. I am the one, who diverges or puts you on the right path. I am the evil as well as the divine force.

I am the Mother.

You accept good and divine forms of mine. I am the one, who grants you salvation after fulfillment of your all desires. I am the one, who clears off your way to heaven. You are the Eternal being. I am the power of eternal being always existing inside you. I am the power.

Black Magic Spells

Black Magic spells can be used to harm or hurt another person by performing certain acts even at a distant place – the effect of this technique can be experienced thousands of miles away. With increase of jealousy, frustration, greed, selfishness, negativity and inability to accept other’s happiness & growth, the use of Black magic has become the most common way to take out one’s vindictiveness and get an evil kind of satisfaction from the turmoil of others. This problem has intensified a lot in the last few years, and many are suffering all over the world, totally unaware of the attacks made by no other than their closest friends, acquaintances and relatives. Many prosperous and happy families are ruined by Black magic.

Symptoms of Black Magic Spells

Black magic spells puts a block on a person’s wisdom and intelligence and all efforts to solve the problem go fruitless. One feels a mental block, gets disturbed sleep with bad dreams, and negative thoughts. There is heaviness and weight on the heart and constriction in the throat.

At times, there could suddenly be blue marks on thighs without getting hurt, or faster & erratic heartbeat and breathing without any physical exertion. There are quarrels in the family without any reason. One might feel the presence of somebody in the house.

One feels one is not getting one’s due and can achieve much more. One feels suffocated & restless in all circumstances, and is never at peace. One remains depressed, with lack of enthusiasm or desire to live & rise in life.

Effects of Black Magic Spells

Black Magic can really play havoc with the life of the target person by destroying any aspect of life may it be career/business or wealth/prosperity, creating family problems or unnecessary tensions/phobias, adversely affecting children & family, creating chronic health problems, destroying mental peace, intelligence & happiness, cause inner turmoil, unrest & uncharacteristic/abnormal behavior and even cause unnatural deaths in extreme circumstances. The effects of Black Magic become more chronic, dangerous and fatal with time, if untreated, like a horrible disease. It starts spreading like a contagious disease, affecting the person’s mind, brain, body, relationships, attitudes, work, money, marriage, career and everything in life.

Breaking or Reversing Black Magic Spells

Putting a Black Magic Spells on someone is very easy for those knowing even a little bit of Tantrik siddhis / voodoo. But to remove the spell and eliminate its sinister effects needs lot of expertise, continuous & rigorous puja/worship and a combination Siddhis & Sadhna.

Manglik Dosha

Manglik Dosha or Kuja Dosha occurs when Mars is placed at the first, fourth, seventh, eighth or twelfth house in the birth lagna chart. According to some ancient rishis, Manglik dosha also occurs when Mars is placed in the first, fourth, seventh, eighth or twelfth house from the Moon, Venus and the seventh lord. According to sages in the Indian classics, when Mars is placed in a malefic house from the Lagna, the Moon or Venus then the dasha/period of Mars may give inauspicious results.

Manglik Dosha affects the married life of a person in many ways – it creates delay, cheating, hurdles and obstacles in getting married. After marriage, physical, mental or financial hardships are possible for either partner or both. It causes litigations, disputes, false allegations, mismatch of thinking, domestic violence and even may lead to divorce or disintegration of marriage anyway.

Mars is considered the most malefic planet as far as one’s marriage is concerned. Mars is a furious planet and its placement in certain houses creates Manglik dosha. Marriage is considered as one of the most auspicious ceremony in life. The most common effect of Manglik dosha is – delay in marriage. Manglik dosha causes the marriage to be solemnized as late as in 40s. Apart from this if a manglik boy/girl is married to a non-manglik spouse, the event of death or severe accidents are witnessed by many couples which lead to permanent disability of the non-manglik person. Manglik dosha causes excessive delay in the marriage. There are so many boys/girls who are affected by this dosha. They have to go through the bad phases of life whether it is due to delay in marriage, fight between couples, divorce or disintegration anyway. Hence, it is advisable that a Manglik boy or girl must always be married to a manglik partner only. Some experts have the opinion that the Manglik Dosha is neutralized when the native reaches his late 30s in life.

Remedies of manglik dosha:

There are some general remedies which are applicable and beneficial to all natives affected by manglik dosha anyway. Chanting Hanuman chalisa or praying goddess Parvati is much beneficial to reduce the effect of manglik yoga. For the people who are having lesser manglik dosha, only doing above mentioned remedies will be enough. If the severity of manglik dosha is higher, some complex remedies are required to be done. These are prescribed in Vedic scriptures to remove the ill effect of manglik dosha to the full extent.

But, it does not mean that one should be scared of Manglik dosha. Efforts can be made for a person having manglik dosha to get married with another Manglik one because when the equation is similar, it gets nullified and the couple leads a happy married life.

Now you can know the detailed Manglik Dosha report for personalized reading and its effects in your horoscope. We will also guide you about the Vedic remedies to minimize it.

Kaal Sarp Yoga

Kaal sarp yoga
Kaal sarp yoga

The Kaal Sarp Yoga is formed when all the planets are situated between Rahu and Ketu. Kaal means death. The person born under Kaal Sarp yoga/equation passes through death like agonies throughout the life. If all seven planets exist between Rahu & Ketu then it affects one’s life badly. The person who takes birth in this yoga/equation suffers from various troubles like problems in progeny or having child, health, loss in business, family problems etc. Kaal Sarp yoga is more dangerous than other malefic yoga. Kaal Sarp equation affects a person till 47 years and some time throughout his life. It depends upon the position of Kaal Sarp yoga. If in a horoscope, partially few planets are outside the axis of Rahu and Ketu then it is known as Partial Kaal Sarp yoga.

Effects of Kaal Sarp yoga

A person having Kaal Sarp yoga in his horoscope faces problems of instability in his life, defame, poor health, problems in progeny and mental agony etc. A person affected by Kaal Sarp yoga will see animals and reptiles like snakes in his dreams and has to struggle very hard to get success throughout his life. Kaal Sarp Yoga gulps the positive effects of the house where it starts and ends. This way the benefit one is supposed to get, is completely stopped.

The native having Kaal Sarp Yoga suffers from mental stress, hurdles in gain of wealth, barriers in having children and uninterrupted disputes in married life. Usually the native sees bad dreams and there is danger of sudden death. The native does not get full reward of his talents. Normally, the success in work is delayed. Sudden loss of money or prestige is an indication of this yoga. The native, without any reason, suffers from the diseases that are not cured by medicine.

For Example, if someone has a Kaal Sarp Yoga affecting the first and seventh house, it will cause him prolonged illness and will adversely affect his/her relationship with the spouse or beloved.

To remove the bad effects of Kaal Sarp Dosha, it is necessary to worship the Snake(s) and lord Shiva in the form of Mahakaleshwar as per Vedic astrology. The complete resolution occurs when a snake-couple made by the Gold or Silver (male snake) and Copper (female snake) is immersed in a holy river reciting Vedic mantras by a noble priest. It is the most effective remedy to uproot it.

Vashikaran yantra

vashikaran yantra
vashikaran yantra

Vashikaran yantra is used to control one’s mind. If you love someone and want him/her to be attracted towards you, this yantra will help you. If your beloved or husband ignores or doesn’t listen you or going after or with someone else, you can create love for you in his mind.

          This yantra can also be used to attract the individuals, in-laws and people or group. But it is necessary that you must not have malefic intention. You should be true from the core of your heart. Using its intentionally means to make the respective god or goddess angry. So, use it to beget love and humanity. You will definitely get success.

मैं शक्ति हुँ

मैं शक्ति हुँ
मैं शक्ति हुँ

मैं शक्ति हुँ। मैं माया हुँ। जहाँ शक्ति है वहाँ मैं हुँ। मैं संसार के प्रत्येक धर्म में अनेक रूपों में विराजमान हुँ। ये तंत्र मंत्र, जादू टोना, कुछ भी मेरी शक्ति के बिना सम्भव नही है। यह तो स्वमं मुझे भी पता नही होता कि कौन मेरे किस रूप का आह्वाहन कब करेगा और मुझसे क्या करवाएगा। उस समय मैं साधक के वशीभूत होती हुँ। जैसे अगर कोई किसी को मारना चाहता है तो वो बच नही सकता। अगर बच सकता है तो तब जब वो मेरे किसी दुसरे रूप की पूजा करके उसे भेजे। तब वह उसे नष्ट कर देती है। इस तरह मेरा ही एक रूप बुरा काम करता है, वहीं दुसरा अच्छा काम करता है। माया के बिना दुनिया नही चलती। मोह के बिना मानव जीवन नही चलता। इसी मोह के कारण कोई किसी का बुरा करता है तो कोई किसी का भला करता है। यह सब सृष्टि की माया है।

मैं ही आदिशक्ति हुँ। मैं परमेश्वर की सेविका हुँ। जैसा वो आदेश दे, वो ही कर सकती हुँ। मैं ही माया हुँ। देवों में देवी मैं, राक्षसों में राक्षसी मैं, इंसानों में साधारण नारी भी मैं ही हुँ। जहाँ भी नारी ऊर्जा है, वहाँ मैं ही हुँ। मैं शक्ति हुँ।

मैं ही अच्छा और बुरा करने वाली हुँ। मैं ही मारने वाली और बचाने वाली हुँ। मैं ही बुद्धि हरण करने वाली और सद्बुद्धि प्रदान करने वाली हुँ। मैं ही पथभृष्ट करने वाली और तुम्हें सद्मार्ग पर लाने वाली हुँ। मैं ही नीच कर्मों की माया और पुण्य कर्मों की माया हुँ। मैं जननी हुँ। तुम मेरे पुण्य और अच्छे रूप को अपनाओ। तुम्हें भोग और सर्वसुख प्रदान कर मोक्ष प्राप्ति कराने वाली मैं ही हुँ। तुम्हारे लिये परमधाम का मार्ग प्रशस्त करने वाली मैं ही हुँ। तुम ब्रह्म हो। तुम में एकाकार ब्रह्म की माया मैं ही हुँ। मैं शक्ति हुँ।